क्यों करवाते है लोग सत्यनारायण की पूजा ? कौन है सत्यनारायण ?

सत्यनारायण का सीधा सा अर्थ है- “सत्य ही नारायण है” अर्थात यदि आप सत्य का पालन करते हैं तो आप स्वयं नारायण का स्वरुप हो जाएंगे l भगवान् को नारायण कहते हैं और सत्य की तुलना नारायण से की जाती हैं l सत्य नारायण की पूजा कथा से ...

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शराब क्यों नहीं पीना चाहिए ? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शराब पीने से क्या क्या नुकसान हैं ?

वैसे तो जो शराब पिता है वह भी जानता है और जो नहीं पिता वह भी जानता है की शराब अच्छी चीज नहीं है l शराब पिने वाला अपने धन की तो बर्बादी करता ही है, साथ ही साथ समय भी नष्ट होता है और तीसरी बात समाज में अपमानित भी होता है फिर ऐसी<a ...

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कलश को मंगलक सूचक क्यों माना जाता है ?

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार कलश में ब्रह्मा, विष्णु और महेश – सृष्टि की इन तीन सर्वश्रेष्ठ शक्तियों का तथा मातृगण अर्थात माताओं का निवास बताया गया है I सीता जी की उत्त्पत्ति के विषय में प्रमाण मिलता है के राजा जनक के राज्य में सूखा ...

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चमड़े की वस्तुएं अपवित्र क्यों मानी जाती है ? जबकि वही चमड़ा हमारे शरीरों में है I क्या हम सभी अपवित्र है ?

  किसी के घर किसी की मृत्यु हो जाती है तो लोग इक्कठा होते हैं और हर कोई यही कहता है की मृतक शरीर को ज्यादा देर घर में नहीं रखना चाहिए यह अलग बात है के कोई साफ़ शब्दों में नहीं कहता I जिसके जीवित लोग प्रसन्न रहते हैं I उसके मरते ही ...

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मुस्लिम धर्म के लोग “786” को अति पवित्र क्यों मानते है ?

हिन्दु धर्म के लोग कोई कार्य शुरू करते हैं तो “श्री गणेशाय नमः” लिखते हैं या कहते हैं इस काम का हम “श्री गणेश” कर रहे हैं जिसका तात्पर्य शुभारम्भ से होता हैं I हिन्दू धर्म में गणेश जी प्रथम पूज्य और सभी देवताओं ...

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मृतक (मरे हुए) के मुख पर चन्दन कि लकड़ी रखकर क्यों जलाते है ?

चन्दन की लकड़ी अत्यंत शीतल (ठंडी) होती है l उसकी ठंडक के कारण लोग चन्दन को घिसकर मस्तक (ललाट) पर लगते हैं जिससे दिन भर दिमाग को शीतलता प्राप्त होती है l इतना ही नहीं चन्दन की शीतलता विश्व प्रसिद्द है l चन्दन के वृक्ष की शीतलता पाने के ...

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shanidev

शनिदेव लंगड़े क्यों हैं ?

शनिदेव के लंगड़े होने की पौराणिक कथा है l ये सूर्यदेव के पुत्र हैं इनकी माता का नाम संज्ञा है l एक बार सूर्यदेव का तेज सहन न कर पाने से संज्ञा ने अपने शरीर से अपनी प्रतिमूर्ति छाया को प्रकट करके कहा कि तुम मेरे स्वामी के साथ रहो और मेरे ...

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